न्यूज़ डेस्क(शुभम गुप्ता): योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली यूपी सरकार निकाय चुनाव से पूर्व, निकायों से सटे घने आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्रों को निकायों में शामिल कर विकास का सपना संजो रही है। सरकार की मंशा है कि ग्रामीण क्षेत्रों का नगर में समायोजन हो जाने से उनका तेजी से विकास होगा, उन क्षेत्रों को भी नगर जैसी सुविधाएँ मिल सकेगी। इसी मद्देनजर मुख्यमंत्री ने अपने कैबिनेट बैठक में अपने गृह जनपद गोरखपुर को भी दो नवीन नगर पंचायतों के गठन के साथ ही बड़हलगंज नगर पंचायत के विस्तार को मंजूरी दे दी।
बड़हलगंज नगर विस्तार में अपनी महत्वपूर्ण योगदान दिखाते हुए नगर के ही समीप निवास करने वाले लखनऊ विधानसभा में योगी आदित्यनाथ जी के ही सरकार के सहयोगी “माननीय” ने प्रेस रिलीज जारी कर शामिल हुए ग्रामीण क्षेत्रों की सुचना के साथ ही जनता व सरकार को बधाई दे दिया। ग्रामीण क्षेत्र की जनता इस सौगात से काफी खुश थी तो वही विस्तार में शामिल ग्रामीण क्षेत्र के नेताजी लोगों ने भी चेयरमैन बनने की तैयारी शुरू कर दी। यहाँ तक तो ठीक था लेकिन सोशल मीडिया पर मंगलवार को नगर विस्तार को लेकर वायरल हुए गजट और नए शामिल क्षेत्रों की सूचि देखकर बहुत से लोगों के होश फाख्ता हो गए। कारण यह कि “माननीय” ने प्रेस रिलीज जारी कर जिन ग्रामीण क्षेत्रों की सूची बताई थी उनमे से कुछ क्षेत्रों के नाम ही गायब थें। खासकर उन गावों का नाम गायब है जो घनी आबादी होने के साथ ही नगर से सटे हुए हैं, साथ ही साथ गायब नामों में ही “माननीय” का आवास भी आता है।
हालाँकि जनता इस सूची से काफी हतप्रभ है। जनता का कहना है कि आखिर क्या कारण है की नगर से ही सटे घने आबादी वाले गांवों को नगर पंचायत के विस्तार में नहीं शामिल किया गया है? जब इस विषय पर “माननीय” से बात की गई तो उन्होंने भी इसे आश्चर्यजनक बताया। हालाँकि जानकारों का मानना है कि नगर के वर्तमान राजा अपनी कुर्सी बनाये रखना चाहते हैं, इसी मद्देनजर वह समीकरण को साध रहें हैं। नगर के राजा को इस बात का डर सता रहा था कि कहीं ऐसा न हो कि “माननीय” सत्ता और पद का लाभ उठाकर अपनी पत्नी को सत्तासीन पार्टी से चुनाव मैदान में उतार दे और राजा की कुर्सी ही चली जाए। इस खौफ से नगर के राजा ने अधिकारीयों से ऐसी सेटिंग की, कि “माननीय” के गांव के साथ ही कुछ और क्षेत्रों को भी विस्तार के दायरे से बाहर करा दिया और माननीय को भनक तक ना लगी।





